This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website. Learn more

भारत का इतिहास ,प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी अनछुई कहानियां । आइए जानते और देखते हैं हम।

x

भारत का इतिहास ,प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी अनछुई कहानियां । आइए जानते और देखते हैं हम।

भारत का इतिहास ,प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी अनछुई कहानियां । आइए जानते और देखते हैं हम।

भारत का इतिहास भारत का इतिहास कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। 65,000 साल पहले, पहले आधुनिक मनुष्य, या होमो सेपियन्स, अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचे थे, जहां वे पहले विकसित हुए थे। सबसे पुराना ज्ञात आधुनिक मानव आज से लगभग 30,000 साल पहले दक्षिण एशिया में रहता है।
भारतीय इतिहास इतना समृद्ध है कि देश के हर हिस्से में आपको एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक स्थल, प्राचीन किले और भव्य महल दिख जाएंगे। इन ऐतिहासिक स्थलों के पीछे छिपी है प्यार, वीरता, ताकत और युद्ध की प्रसिद्ध कहानियां। हम आपको बता रहे हैं

प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी कहानियों के बारे में...

भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है। भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा के मानस पुत्र स्वयंभु मनु ने व्यवस्था सम्भाली। इनके दो पुत्र, प्रियव्रत और उत्तानपाद थे।

प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्‍यता सबसे प्रारंभिक सभ्‍यता है। इसका नामकरण हिन्‍दुओं के प्रारम्भिक साहित्‍य वेदों के नाम पर किया गया है। वैदिक सभ्‍यता सरस्‍वती नदी के किनारे के क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब और हरियाणा राज्‍य आते हैं, में विकसित हुई। वैदिक हिन्‍दुओं का पर्यायवाची है, यह वेदों से निकले धार्मिक और आध्‍यात्मिक विचारों का दूसरा नाम है।

इस अवधि के दो महान ग्रंथ रामायण और महाभारत थे।

भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व 7 वीं और शुरूआती 6 वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे।

भारत का इतिहास और संस्‍कृति गतिशील है और यह मानव सभ्‍यता की शुरूआत तक जाती है। यह सिंधु घाटी की रहस्‍यमयी संस्‍कृति से शुरू होती है और भारत के दक्षिणी इलाकों में किसान समुदाय तक जाती है। भारत के इतिहास में भारत के आस पास स्थित अनेक संस्‍कृतियों से लोगों का निरंतर समेकन होता रहा है। उपलब्‍ध साक्ष्‍य सुझाते हैं कि लोहे, तांबे और अन्‍य धातुओं के उपयोग काफी शुरूआती समय में भी भारतीय उप महाद्वीप में प्रचलित थे, जो दुनिया के इस हिस्‍से द्वारा की गई प्रगति का संकेत है। चौंथी सहस्राब्दि बी. सी. के अंत तक भारत एक अत्‍यंत विकसित सभ्‍यता के क्षेत्र के रूप में उभर चुका था।

Hominins expansion from Africa is estimated to have reached the Indian subcontinent approximately two million years ago, and possibly as early as 2.2 million years before the present. The Bronze Age in the Indian subcontinent began around 3300 BCE. Along with Ancient Egypt and Mesopotamia, the Indus valley region was one of three early cradles of civilisation of the Old World. History of Hinduism, History of Buddhism, History of Jainism, Indian religions, and Indian philosophy
Laitmawsiang, Meghalaya, Chettinad Palace, Tamil Nadu, Tada Falls, Ubbalamadugu Falls, Andhra Pradesh, Jhatingri, Himachal Pradesh, Doodhpathri, Kashmir, halakudy, Kerala, Adalaj Stepwell, Gujarat, Kashid, Maharashtra, Konarak Temple, Bada Imambada, Hawa Mahal, Kamakhya Temple, Khajuraho Temple, Kumbalgarh Fort, Leh Laddakh, Lepakshi Temple, Rani Ki Vaav, Taj Mahal, Tawang Monestery, Victoria Memorial, Tawang, Arunachal Pradesh, Shettihalli, Karnataka, Majuli, Assam, Banaras, Uttar Pradesh, Bishnupur, West Bengal, Uttarakhand, Patan, Gujarat, Meghalaya, Churu, Rajasthan, Jammu & Kashmir, इतिहास से सबंधित नोट्स विश्व का इतिहास. हिंदी नोट्स फॉर UPSC, SSC, GK. History book in hindi मध्यकालीन pdf, आधुनिक, bharat ka itihas, IAS exam, प्राचीन भारत, india history hindi, history of india, brief history of india , complete history of india in hindi, world history in hindi,

historical places in india, historical monuments of india, historical places, हवा महल,लाल किला,भारत का इतिहास,ताज महल,खजुराहो मंदिर,कुतुब मीनार,ऐतिहासिक स्थल,historical places in India,historical places in delhi,historical monuments of india,Travel News,Travel News in Hindi,Travel Latest News,Travel Headlines,ट्रैवल, History of Ancient India, प्राचीन भारत के इतिहास, भारत का इतिहास, भारत के इतिहास , भारत वासियों ने ही बनाया है प्राचीन भारत, bharat ka itihas video, Find Ancient Indian History, Indian History Quiz, General Knowledge about Indian history, भारतीय इतिहास, Ancient India, mystery, Hindustan, प्राचीन भारत, रहस्य, हिन्दुस्तान, history of India, Hindustani Indian History, chronicle, Indian memorials, History texts, Indian King, Indian Leader History, Religious History, History of Religion, History of Indian Science, History of Indian Film, History of Indian Politics, History of Indian Music, Geography, History of Indian States, itihaas, District, History of Indian society, India history place, Ancient Indian Culture and History, great ancient empires, भारतीय इतिहास, इंडियन हिस्ट्री, भारतीय राजा, हिन्दुस्तानी इतिहास, भारतीय इति इतिवृत्त, इतिहास ग्रंथ, भारतीय नेता, धार्मिक इतिहास, धर्म का इतिहास, भारतीय विज्ञान का इतिहास, भारतीय फिल्म का इतिहास, भारतीय राजनीति का इतिहास, हिंदुस्तानी संगीत का इतिहास, भूगोल, भारतीय राज्यों का इतिहास, जनपद, भारतीय समाज का इतिहास, महान प्राचीन साम्राज्य, भारत और विश्व का इतिहास,
x

असम के आदिवासियों के अनछुई कहानियां, इतिहास। कैसा जीवन हैं इनका, लोगो की ज़िन्दगी सँघर्ष जमीनी हकीकत।

असम के आदिवासियों के अनछुई कहानियां, इतिहास। कैसा जीवन हैं इनका, लोगो की ज़िन्दगी सँघर्ष जमीनी हकीकत।

2001 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल जनसंख्या के प्रतिशत में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 12.4 प्रतिशत थी। असम ट्रिब्यून 2009 में खबर दी है कि असम के जनजातीय समुदायों अब आधिकारिक तौर पर कुल आबादी का 15.64 प्रतिशत के लिए खाते।

भारत का संविधान असम की जनजातियों को दो समूहों में वर्गीकृत करता है: अनुसूचित जनजातियाँ (पहाड़ियाँ) और अनुसूचित जनजातियाँ (मैदान)। चूंकि मैदानी इलाकों में रहने वाली पहाड़ियों और बड़ी संख्या में पहाड़ियों में रहने वाले जनजातियों को संबंधित स्थानों में अनुसूचित जनजातियों के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए जनगणना के आंकड़े सही आंकड़े नहीं दर्शा सकते हैं। असम ट्रिब्यून ने दावा किया है कि यदि जनजातियों की इन श्रेणियों को वास्तविक जनसंख्या में गिना जाता है। असमिया भाषा का प्रयोग लगभग सभी जनजातियों द्वारा लिंगुआ फ्रेंका के रूप में किया जाता है । असम के विभिन्न अन्य स्वदेशी समुदाय सभी जनजाति थे लेकिन बाद में अभियोग के माध्यम से गैर आदिवासी का दर्जा प्राप्त कर लिया गया जैसे अहोम, मोरन, मोटक, केओट (कैबार्टा), सुतिया, कोच राजबंशी आदि।

मुख्य अनुसूचित जनजाति (मैदान) बोडो , देवरी , कचहरी , Mising आदि हैं और कार्बी, दिमासा आदि को अनुसूचित जनजाति (पहाड़ियों) का दर्जा प्राप्त है।

असम या आसाम उत्तर पूर्वी भारत में एक राज्य है। असम अन्य उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों से घिरा हुआ है। असम भारत का एक सीमांत राज्य है जो चतुर्दिक, सुरम्य पर्वतश्रेणियों से घिरा है। यह भारत की पूर्वोत्तर सीमा २४° १' उ॰अ॰-२७° ५५' उ॰अ॰ तथा ८९° ४४' पू॰दे॰-९६° २' पू॰दे॰) पर स्थित है। संपूर्ण राज्य का क्षेत्रफल ७८,४६६ वर्ग कि॰मी॰ है। भारत - भूटान तथा भारत - बांग्लादेश सीमा कुछ भागो में असम से जुडी है। इस राज्य के उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड तथा मणिपुर, दक्षिण में मिजोरम तथा मेघालय एवं पश्चिम में बंग्लादेश स्थित है।

विशेषज्ञों के अनुसार 'आसाम' नाम काफी परवर्ती है। पहले इस राज्य को 'असम' कहा जाता था।

सामान्य रूप से माना जाता है कि असम नाम संस्कृत से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ है, वो भूमि जो समतल नहीं है। कुछ लोगों की मान्यता है कि आसाम संस्कृत के शब्द अस्म अथवा असमा, जिसका अर्थ असमान है का अपभ्रंश है। कुछ विद्वानों का मानना है कि 'असम' शब्‍द संस्‍कृत के 'असोमा' शब्‍द से बना है, जिसका अर्थ है अनुपम अथवा अद्वितीय। आस्ट्रिक, मंगोलियन, द्रविड़ और आर्य जैसी विभिन्‍न जातियां प्राचीन काल से इस प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों में समय-समय पर आकर बसीं और यहाँ की मिश्रित संस्‍कृति में अपना योगदान दिया। इस तरह असम में संस्‍कृति और सभ्‍यता की समृ‍द्ध परंपरा रही है।

कुछ लोग इस नाम की व्युत्पत्ति 'अहोम' (सीमावर्ती बर्मा की एक शासक जनजाति) से भी बताते हैं।

आसाम राज्य में पहले मणिपुर को छोड़कर बंगलादेश के पूर्व में स्थित भारत का संपूर्ण क्षेत्र सम्मिलित था तथा उक्त नाम विषम भौम्याकृति के संदर्भ में अधिक उपयुक्त प्रतीत होता था क्योंकि हिमालय की नवीन मोड़दार उच्च पर्वतश्रेणियों तथा पुराकैब्रियन युग के प्राचीन भूखंडों सहित नदी (ब्रह्मपुत्) निर्मित समतल उपजाऊ मैदान तक इसमें आते थे। परन्तु विभिन्न क्षेत्रों की अपनी संस्कृति आदि पर आधारित अलग अस्तित्व की माँगों के परिणामस्वरूप वर्तमान आसाम राज्य का लगभग ७२ प्रतिशत क्षेत्र ब्रहपुत्र की घाटी (असम की घाटी) तक सीमित रह गया है जो पहले लगभग ४० प्रतिशत मात्र ही था।

प्राचीन भारतीय ग्रंथों में इस स्थान को प्रागज्योतिच्ह के नाम से जाना जाता था। महाभारत के अनुसार कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध ने यहाँ की उषा नाम की युवती पर मोहित होकर उसका अपहरण कर लिया था। श्रीमद् भागवत महापुराणके अनुसार उषाने अपनी सखी चित्रलेखाद्वारा अनिरुद्धको अपहरण करवाया | यह बात यहाँ की दन्तकथाओं में भी पाया जाता है कि अनिरुद्ध पर मोहित होकर उषा ने ही उसका अपहरण कर लिया था। इस घटना को यहाँ कुमार हरण के नाम से जाना जाता है।

आसाम की आदिम जातियाँ संभवत: आर्य तथा मंगोलीय जत्थे के विभिन्न अंश हैं। यहाँ के जातियों को कई समूहों में विभाजित की जा सकती है। प्रथम ब्राह्मण, कलिता (कायस्थ), नाथ (योगी) इत्यादि हैं जो आदिकाल में उत्तर भारत से आए हुए निवासियों के अवशेष मात्र हैं। दूसरे समूह के अंतर्गत आर्य-मंगोलीय एवं मंगोलीय जनसमस्ति जैसे के आहोम, सुतिया, मरान, मटक, दिमासा (अथवा पहाड़ी कछारी), बोडो (या मैदानी कछारी), राभा, तिवा, कार्बी, मिसिंग,ताई,ताई फाके तथा कुकी जातियां हैं। इन मे से बहुत सारे जातियां असम के ऊपरी जिलों (उजनि) में रहते हैं और अन्य जातियां आसाम के निचले भागों (नामोनि) में रहते हैं। नामोनि के कोच जाती असम के एक प्रमुख जाती है जो गोवालपारा, धुबूरी इत्यादि राज्यों में ये राजवंशी के नाम से प्रसिद्ध हैं। कोइवर्त्त यहाँ की मछली मारने वाली जाति है । आधुनिक युग में यहाँ पर चाय के बाग में काम करनेवाले बंगाल, बिहार, उड़ीसा तथा अन्य प्रांतों से आए हुए जातियां और आदिवासियां भी असमिया मूलस्रोत के अंश बन गए हैं । इन सब जातियां समन्वित हो कर असमिया नाम के अखंड जाती को जन्म दिया है । साथ ही साथ, सभी जातियों के विचित्र परम्पराएं मिलकर भी एक अतुलनीय संस्कृति सृष्ट हुवे जिसका.

असम की जनजातियाँ, असम का इतिहास, असमिया भाषा, असम के आदिवासी, देवरी, , कचहरी , Mising आदि हैं, असम history hindi, असम का इतिहास, असम राज्य का इतिहास, Assam in Hindi. असम से जुड़े बुनियादी तथ्य, राजधानी – दिसपुर, आधिकारिक भाषा – असामी, बंगाली और हिंदी, असम, असम, Travel and Tourist Information असम, असम history hindi, असम के जिले, असम का प्राचीन नाम क्या था, असम की संस्कृति, असम का पहनावा, असम की भाषा, असम सिटी, असम का खाना, असम का नक्शा
x

बिहार वह ऐतिहासिक जगह है जहां भगवान बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ। इतिहास, अनछुई बातें देखते हैं हम।

बिहार वह ऐतिहासिक जगह है जहां भगवान बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ। दुनियाभर में अपनी पैठ बना चुके बुद्ध धर्म की जड़े बिहार के बौद्ध गया से जुड़ी हैं। यही नहीं जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर का जन्म राजधानी पटना के दक्षिण-पश्चिम में स्थित पावापुरी कस्बे में हुआ और उन्हें निर्वाण भी बिहार की धरती पर ही प्राप्त हुआ था।

बिहार भारत के उत्तर भाग में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक राज्य है और इसकी राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखण्ड, पूर्व में पश्चिम बंगाल, और पश्चिम में उत्तर प्रदेश स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल में विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सामान्य योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है।

सन् 1936 ई• में ओडिशा और सन् 2000 ई• में झारखण्ड के अलग हो जाने से बिहार ने कृषि के दम पर और अपने मेधा को लेकर उन्नति की है। आई आई टी और संघ लोक सेवा आयोग जैसे कठिन परीक्षा में लगभग हर बार बिहार के प्रतिभागी शिखर पर होते हैं।
भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार वर्तमान में 13 वाँ राज्य है।

बिहार का प्राचीन नाम मगध है जिसकी राजधानी प्राचीन में राजगीर थी। बिहार की वर्तमान राजधानी पटना का ऐतिहासिक नाम पाटलिपुत्र है। मगध सम्राज्य के महा प्रतापी राजा जरासंध हुए।

सारण जिले में गंगा नदी के उत्तरी किनारे पर चिरांद, नवपाषाण युग (लगभग 4500-2345 ईसा पूर्व) और ताम्र युग ( 2345-1726 ईसा पूर्व) से एक पुरातात्विक रिकॉर्ड है। बिहार के क्षेत्र जैसे-मगध, मिथिला और अंग- धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन भारत के महाकाव्यों में वर्णित हैं।
मिथिला को पहली बार इंडो-आर्यन लोगों ने विदेह साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रतिष्ठा प्राप्त की। देर वैदिक काल (सी। 1600-1100 ईसा पूर्व) के दौरान, विदेह् दक्षिण एशिया के प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक बन गया, कुरु और पंचाल् के साथ। वेदहा साम्राज्य के राजा यहांजनक कहलाते थे। मिथिला के जनक की पुत्री एक थी सीता जिसका वाल्मीकि द्वारा लिखी जाने वाली हिंदू महाकाव्य, रामायण में भगवान राम की पत्नी के रूप में वर्णित है। बाद में विदेह राज्य के वाजिशि शहर में अपनी राजधानी था जो वज्जि समझौता में शामिल हो गया, मिथिला में भी है। वज्जि के पास एक रिपब्लिकन शासन था जहां राजा राजाओं की संख्या से चुने गए थे। जैन धर्म और बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथों में मिली जानकारी के आधार पर, वज्जि को 6 ठी शताब्दी ईसा पूर्व से गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था, गौतम बुद्ध के जन्म से पहले 563 ईसा पूर्व में, यह दुनिया का पहला गणतंत्र था। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म वैशाली में हुआ था।
भारत की पहली साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य द्वारा नंद वंश को बदल दिया गया था। मौर्य साम्राज्य और बौद्ध धर्म का इस क्षेत्र में उभार रहा है जो अब आधुनिक बिहार को बना देता है। 325 ईसा पूर्व में मगध से उत्पन्न मौर्य साम्राज्य, चंद्रगुप्त मौर्य ने स्थापित किया था, जो मगध में पैदा हुआ था। इसकी पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में इसकी राजधानी थी। मौर्य सम्राट, अशोक, जो पाटलीपुत्र (पटना) में पैदा हुए थे, को दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा शासक माना जाता है। मौर्य सम्राजय भारत की आजतक की सबसे बड़ी सम्राजय थी ये पश्चिम मे ईरान से लेकर पूर्व मे बर्मा तक और उत्तर मे मध्य-एशिया से लेकर दक्षिण मे श्रीलंका तक पूरा भारतवर्ष मे फैला था।
उत्तर में भूमि प्रायः सर्वत्र उपजाऊ एवं कृषियोग्य है। धान, गेंहूँ, दलहन, मक्का, तिलहन, तम्बाकू,सब्जी तथा केला, आम और लीची जैसे कुछ फलों की खेती की जाती है। हाजीपुर का केला एवं मुजफ्फरपुर की लीची बहुत ही प्रसिद्ध है।

CREDIT: Bihar Tourism & Bihar Government.

पटना, गया, औरंगाबाद, नवादा जिला, नालंदा जिला, जहानाबाद जिला, मगध, अंग, मिथिला, छठ, होली, दीपावली, दशहरा, महाशिवरात्रि, नागपंचमी, श्री पंचमी, मुहर्रम, ईद, ईदु-ल-अज़हा, दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म स्थान, सत्तू, चूड़ा-दही और लिट्टी-चोखा, गा, कोशी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर तथा मगध प्रमंडल, बिहार के इतिहास , बिहार का प्राचीन इतिहास का विस्तार, इतिहास के पन्नों में बिहार, history of bihar,बिहार समागम,बिहार, Bihar History in Hindi, Bihar,Patna,Patna, Bihar News, Patna News, बिहार समाचार, पटना समाचार,patna News,पटना न्यूज़,पटना समाचार, गुरुनानक देव जी डॉक्यूमेंट्री, bihar, nitish kumar, patna, history, vaishali, bodhgaya, amazing facts, बिहार, पटना, नीतीश कुमार, वैशाली, बोधगया, इतिहास, बिहार राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य, Bihar Facts in Hindi, मुजफ्फरपुर, बिहार इतिहास, प्राचीन भारत, रहस्य, हिन्दुस्तान, history of India, Hindustani Indian History, chronicle, Indian memorials, History texts, Indian King, Indian Leader History, Religious History, History of Religion, History of Indian Science, History of Indian Film, History of Indian Politics, History of Indian Music, Geography, History of Indian States, itihaas, District, History of Indian society, India history place, Ancient Indian Culture and History, great ancient empires, भारतीय इतिहास, इंडियन हिस्ट्री, भारतीय राजा, हिन्दुस्तानी इतिहास, भारतीय इति इतिवृत्त, इतिहास ग्रंथ, भारतीय नेता, धार्मिक इतिहास, धर्म का इतिहास, भारतीय विज्ञान का इतिहास, भारतीय फिल्म का इतिहास, भारतीय राजनीति का इतिहास, हिंदुस्तानी संगीत का इतिहास, भूगोल, भारतीय राज्यों का इतिहास, जनपद, भारतीय समाज का इतिहास, महान प्राचीन साम्राज्य, भारत और विश्व का इतिहास, प्राचीन.
x

The Power Of Gentleness [A remarkable story of Swami Vivekananda's life] - हिंदी डाक्यूमेंट्री

The Power Of Gentleness [A remarkable story of Swami Vivekananda's life] - हिंदी डाक्यूमेंट्री

स्वामी विवेकानन्द (जन्म: १२ जनवरी,१८६३ – मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत ” मेरे अमेरिकी भाइयों एवं बहनों ” के साथ करने के लिए जाना जाता है । उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।

स्वामी विवेकानंद का जीवनवृत्त

स्वामी विवेकानन्द का जन्म १२ जनवरी सन्‌ १८६3 को कलकत्ता में हुआ था। इनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। उनके पिता पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेन्द्र को भी अँग्रेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढर्रे पर चलाना चाहते थे। इनकी माता श्रीमती भुवनेश्वरी देवीजी धार्मिक विचारों की महिला थीं। उनका अधिकांश समय भगवान् शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेन्द्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ‘ब्रह्म समाज’ में गये किन्तु वहाँ उनके चित्त को सन्तोष नहीं हुआ। वे वेदान्त और योग को पश्चिम संस्कृति में प्रचलित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते थे।

दैवयोग से विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। घर का भार नरेन्द्र पर आ पड़ा। घर की दशा बहुत खराब थी। अत्यन्त दर्रिद्रता में भी नरेन्द्र बड़े अतिथि-सेवी थे। स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रात भर भीगते-ठिठुरते पड़े रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते।

स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने गुरुदेव श्रीरामकृष्ण को समर्पित कर चुके थे। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुम्ब की नाजुक हालत की चिंता किये बिना, स्वयं के भोजन की चिंता किये बिना वे गुरु-सेवा में सतत संलग्न रहे। गुरुदेव का शरीर अत्यन्त रुग्ण हो गया था।

विवेकानंद बड़े स्‍वपन्‍द्रष्‍टा थे। उन्‍होंने एक नये समाज की कल्‍पना की थी, ऐसा समाज जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्‍य-मनुष्‍य में कोई भेद नहीं रहे। उन्‍होंने वेदांत के सिद्धांतों को इसी रूप में रखा। अध्‍यात्‍मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकता है कि समता के सिद्धांत की जो आधार विवेकानन्‍द ने दिया, उससे सबल बौदि्धक आधार शायद ही ढूंढा जा सके। विवेकानन्‍द को युवकों से बड़ी आशाएं थीं। आज के युवकों के लिए ही इस ओजस्‍वी संन्‍यासी का यह जीवन-वृत्‍त लेखक उनके समकालीन समाज एवं ऐतिहासिक पृ‍ष्‍ठभूमि के संदर्भ में उपस्थित करने का प्रयत्‍न किया है यह भी प्रयास रहा है कि इसमें विवेकानंद के सामाजिक दर्शन एव उनके मानवीय रूप का पूरा प्रकाश पड़े।

शिकागो धर्म महा सम्मलेन भाषण
अमेरिकी बहनों और भाइयों,
आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं। संसार में संन्यासियों की सब से प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।
उनके ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों की प्रसिद्धि विश्चभर में है। जीवन के अंतिम दिन उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा “एक और विवेकानंद चाहिए, यह समझने के लिए कि इस विवेकानंद ने अब तक क्या किया है।

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ।।
“संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना।“

स्वामी विवेकानंद की जीवनी , Biography Of Swami Vivekananda, स्वामी विवेकानंद का जीवनवृत्त, स्वामी विवेकानन्द द्वारा कही गयीं उक्तियाँ ,Great Quotations By Swami Vivekananda, स्वामी विवेकानंद का बचपन, swami vivekanand biography, स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय, swami vivekanand biography hindi, Swami Vivekananda Jayanti 2019, 12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद जयंती, Swami Vivekananda जयंती, जन्म 12 जनवरी 1863, मृत्यु 4 जुलाई 1902, नरेद्रनाथ दत्त, विवेकानंद, Swami Vivekananda Jayanti विवेकानंद की जीवनी, विवेकानंद की कहानी, विवेकानंद पर निबंध, स्वामी विवेकानंद, विवेकानंद के वचन, 2019, swami vivekananda, jayanti, inspiring thought, great quotes, स्वामी विवेकानन्द,स्वामी विवेकानंद, विवेकानन्द, स्वामी विवेकानन्द का जीवन परिचय, Swami Vivekanand Biography in Hindi, Vivekanand Biography, Vivekanand, swami vivekananda hindi, swami vivekananda in hindi thought, swami vivekananda ,success story in hindi, swami vivekananda story in hindi, swami vivekananda biography in hindi, swami vivekanand ka jeevan parichay in hindi, write about swami vivekananda in hindi, swami vivekananda in hindi speech, swami vivekananda history, स्वामी विवेकानंद जीवनी ,Biography in Hindi Jivani, National youth day, national youth day 2020, स्वामी विवेकानंद, नेशनल युवा दिवस, युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद की माता का नाम, swami vivekananda jayanti, swami vivekananda, swami vivekananda childhood and school days,.
x

मेघालय (Meghalaya) भारत के उत्तर पूर्व में स्थित है पहाड़ियों में छिपा यह स्वर्ग हैं। कुछ अनछुई बाते

मेघालय (Meghalaya) भारत के उत्तर पूर्व में स्थित एक राज्य है, पहाड़ियों में छिपा यह स्वर्ग कुछ अनछुई बाते ।

Meghalaya is a hilly state in northeastern India. The name means the abode of clouds in Sanskrit. The population of Meghalaya as of 2016 is estimated to be 3,211,474. Meghalaya covers an area of approximately 22,430 square kilometres, with a length to breadth ratio of about 3:1.

After the Conquest of Taraf in 1304, Shah Arifin Rafiuddin, a disciple of Shah Jalal, migrated and settled in the Khasi and Jaintia Hills where he preached Islam to the local people. His khanqah remains in Sarping/Laurergarh on the Bangladeshi border but the part containing his mazar is in Meghalaya on top of Laur Hill.

Meghalaya is one of the Seven Sister States of northeast India. The state of Meghalaya is mountainous, with stretches of valley and highland plateaus, and it is geologically rich. It consists mainly of Archean rock formations. These rock formations contain rich deposits of valuable minerals like coal, limestone, uranium and sillimanite.

मेघालय राज्य का गठन असम राज्य के दो जिलो यूनाइटेड खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स को एक साथ जोड़ कर किया गया था। 21 जनवरी 1972 को मेघालय राज्य ने खुदकी विधान सभा के साथ भारत के एक खूबसूरत राज्य के रूप में दर्जा प्राप्त किया है। बाद में ब्रिटिश सरकार ने मेघालय राज्य को असम में शामिल कर लिया था। इसके बाद 16 अक्टूबर 1905 में जब बंगाल का विभाजन किया गया, तो मेघालय असम और पूर्वी बंगाल का एक अहम हिस्सा बन गया। वर्तमान में मेघालय राज्य में 11 जिले हैं।

मेघालय का नामकरण डॉ एस पी चटर्जी ने किया था। डॉ एस पी चटर्जी कोलकत्ता विश्वविधालय में भूगोल के प्राध्यापक थे।

मेघालय की जनजातियों के बारे में बात करे तो मुख्य रूप से यहां तीन जनजातियां खासी, गारो और जयंतिया (पनार) ने निवास किया हैं। लेकिन इसके अलावा भी यहा की कुछ अन्य जनजातियां हजोग और तीवा निवास करती हैं। मेघालय राज्य अपनी परम्पराओं और रस्मो के लिए पूरे भारत वर्ष में जाना जाता हैं। सत्य तो यह भी हैं कि किसी भी राज्य की पहचान उसकी वेशभूषा, रशमो और संस्कृति से होती हैं। मेघालय राज्य के लोगो के पहनावे में एक सादगी देखने को मिलती है जो इस राज्य की खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देती हैं। मेघालय राज्य की महिलाओं के पारंपरिक पहनावे को जेनसेन के रूप में जाना जाता है। इनके द्वारा पहने जाने वाल कपडा बिना सिला हुआ शहतूत के रेशम से बना होता है और शरीर के चारों ओर लपेटा जाता हैं। एंडी शॉल क्षेत्र का एक अन्य प्रमुख पहनावा भी है जो रेशम से बना हुआ होता है।
मेघालय के इस अनदेखे स्वर्ग में बहती है भारत की सबसे साफ नदी
अपनी हाल की मेघालय यात्रा के दौरान - मुझे पहाड़ियों में छिपा यह स्वर्ग दिखा – अगर वाकई स्वर्ग जैसा कुछ होता है तो.
मैंने इस अनमोल हीरे तक पहुंचने के लिये एक ऐसा रास्ता चुना जिस पर कम ही लोग जाते हैं. और यह रास्ता मुझे उम्नगोत नदी तक ले गया, शायद भारत की सबसे साफ नदी तक.
उम्नगोत, भारत-बांग्लादेश सीमा के पास पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के एक छोटे लेकिन व्यस्त कस्बे दावकी के बीच से बहती है. यह कस्बा राजधानी शिलांग से मात्र 95 किलोमीटर दूर है.

दावकी भारत और बांग्लादेश के बीच एक व्यस्त व्यापार मार्ग की तरह कार्य करता है. हर दिन सैकड़ों ट्रक इस कस्बे से होकर गुजरते हैं.

दावकी भारत और बांग्लादेश के बीच एक व्यस्त व्यापार मार्ग की तरह कार्य करता है. हर दिन सैकड़ों ट्रक इस कस्बे से होकर गुजरते हैं.

उम्नगोत आस-पास के क्षेत्रों के मछुआरों के लिए मछली पकड़ने की एक प्रमुख जगह है.
यह नदी जयंतिया की पहाड़ियों के री नार और खासी पहाड़ियों के हिमा खिरीम के बीच एक प्राकृतिक सीमा का काम करती है.इसके ऊपर है एक झूलता हुआ पुल, जो बांग्लादेश का प्रवेश द्वार है. भारत और बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा एक और अनकहा पहलू है तमाबिल चौकी. ये दोनों देशों के बीच आधिकारिक सीमा चौकी होने के साथ ही एक छोटा व्यापारिक कस्बा भी है.

With average annual rainfall as high as 12,000 mm (470 in) in some areas, Meghalaya is the wettest place on earth. The western part of the plateau, comprising the Garo Hills region with lower elevations, experiences high temperatures for most of the year. The Shillong area, with the highest elevations, experiences generally low temperatures. The maximum temperature in this region rarely goes beyond 28 °C (82 °F),whereas sub-zero

मेघालय,Dawki,Umngot, जाने मेघालय के बारे में जानकारी, मेघालय का अर्थ, इतिहास, नाम किसने दिया है, उत्सव, जनजातीयां, लोक नृत्य कौनसा है, वेशभूषा, मुख्य फसल, क्या फेमस हैं, फ्लौरा और फौना, स्थानीय खाना, पर्यटन स्थल, कैसे पहुचे, कहा रुके, फोटो गैलरी। Information About Meghalaya In Hindi, Know More About History, Meaning, Naamkaran, Festival, Janjatiya, Dance, Pehnawa, dress, Fasal, Flora And Fauna, Tourist Attractions, where to stay, how to reach, map and images, Tourist Attractions in मेघालय, मेघालय Tourist Attractions, Places To visit in Meghalaya, Tourism Places in मेघालय, Travel and Tourist Information मेघालय, मेघालय का इतिहास, मेघालय का खाना, मेघालय की 10 प्मुख डिश, मेघालय की सांस्कृति, मैघालय के प्रमुख त्यौहार, मेघालय की प्रमुख जनजातियो मेघालय के पर्यटन स्थल आदि से संबंधित जानकारी हिन्दी में, meghalaya hindi jankari, meghalaya food in hindi, meghalaya ka pathar in hindi, meghalaya festival in hindi, meghalaya information in hindi, meghalaya ke bare mein, meghalaya ka pehnawa, shillong in hindi, meghalaya ki veshbhusha in hindi

गंगा बहती हो क्यों, भारत की इस सबसे पवित्र नदी का इतिहास, धार्मिक, पौराणिक,एवं ऐतिहासिक महत्व भी है।

यह नदी उत्तराखंड से शुरु होकर अंत में बंगाल की खा़ड़ी में जाकर मिलती है। देश की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक गंगा नदी दुनिया के सबसे उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर बहती है। भारत की इस सबसे पवित्र गंगा नदी का उद्दगम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हिमनद से हुआ है।

Ganga is the sacred river of India. Ganga originated from the Gangotri Glacier , which is located in the western Himalayas. It is one of the major rivers of India, which is approximately 1557 miles long. It flows into the eastward directions and empties into the Bay of Bengal.

गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र नदी है जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नदी एवं भारत की चार सबसे लंबी नदियो में से एक है, जो कि भारत और बांग्लादेश में मिलकर करीब 2510 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
यह नदी उत्तराखंड से शुरु होकर अंत में बंगाल की खा़ड़ी में जाकर मिलती है। देश की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक गंगा नदी दुनिया के सबसे उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर बहती है।
भारत की इस सबसे पवित्र गंगा नदी का उद्दगम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हिमनद से हुआ है। गंगोत्री, हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है, यहां गंगा जी को समर्पित एक अन्य मंदिर भी बना हुआ है।
आपको बता दें कि यह पूजनीय नदी गंगा हिमालय से यमुना, कोसी, गंडक और घाघरा जैसी कई नदियों से जुड़ती है। ऐसी मान्यता है कि गंगा नदी के पानी में बैक्टीरिया से लड़ने से खास शक्ति होती है, इसका पानी महीनों रखे रहने के बाद भी कभी खराब नहीं होता है।
इसलिए हिन्दू धर्म में किसी भी पवित्र काम में गंगा नदी के पानी को गंगाजल के रुप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा इसे स्वर्ग की नदी माना जाता है। हिन्दू मान्यताओ के अनुसार गंगा को स्वर्ग की नदी भी कहा गया है। लोगो का ऐसा मानना है की गंगा में स्नान करने से उनके सारे पाप धुल जाते है।

भारतीय संस्कृति की गंगा का जन्म कैसे भी हुआ हो, पर मनुष्य की पहली बस्ती उसकी तट पर आबाद हुई। पामीर के पठारों में गौरवर्णीय सुनहरे बालों वाली आर्य जाति का इष्ट देवता था वरुण। इस जाति की विशेषता थी अमूर्त का चिंतन और खोज। अग्निहोत्र के प्रचलन वाली इस जाति के अनुयायी नरबलि की पद्धति को अपनाते थे। उनके नेता राजा पुरूरवा ने गंगा संगम पर एक बस्ती बसायी जिसे प्रतिष्ठान का नाम दिया उसी के समय में एक और गंधर्व नामक दोनों शाखाएं मीलकर एक हो गई। तभी भारतीय संस्कृति की नींव पड़ी। एलों ने नरबलि छोड़कर अग्निहोत्र को अपना लिया। गंगा की पावन धारा में स्नान कर वह पवित्र हो गये। ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ से संघर्ष करने वाले विश्वामित्र की पुत्री शकुन्तला का विवाह चन्द्रवंशी राजा दुष्यंत से हुआ और उनके पुत्र भरत ने पहली बार इस देश को भारत नाम देकर एक सूत्र में बांधा। सूर्यवंशी भगीरथ ने गंगा के आदि और अंत की खोज की थी। गंगा के तट काशी में जैन तीर्थकंर पार्श्वनाथ का प्रादुर्भाव हुआ तो वहीं सारनाथ में तथागत बुद्ध ने पहला उपदेश दिया। पाटलिपुत्र में नंद साम्राज्य का उदय हुआ तो चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना एवं सम्राट चन्द्रगुप्त के साम्राज्य का निर्माण किया। सम्राट अशोक ने इसी पाटलिपुत्र में अहिंसा और प्रेम के आदेश प्रसारित किए। फिर मौर्यों के बाद आए शुंग तथा तब अश्वमेध यज्ञ होने लगे। शास्त्र और स्मृतियां रची गईं। रामायण और महाभारत इसी काल में पूर्ण हुए। महाभाष्यकार पतंजलि भी इसी समय हुए नागों के भारशिव राजवंश ने गंगा को अपना राज्य चिन्ह बनाया। दस अश्वमेध यज्ञ किये। दशाश्वमेध घाट इसकी स्मृति का ही प्रतीक है। समुद्रगुप्त की दिग्विजय और चन्द्रगुप्त के पराक्रम के साथ सम्राट हर्षवर्धन ने संस्कृति को एक नई दिशा प्रदान की। गंगा के तट पर ही राष्ट्रकूट वंश के ध्रुव ने फिर से इन प्रदेशों को जीत कर गंगा को अपना राज चिन्ह बनाया। अबुलफजल, इब्नेबतूता और बर्नियर महर्षि चरक, बाणभट्ट प्रभृति विशेषज्ञ विद्वजनों को भी गंगा तट पर रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गंगा के अंचल में ही आयुर्वेद का जन्म हुआ। शेरशाह ने माल बंदोबस्त का क्रम गंगा के किनारे पर ही चलाया। महानगर कोलकाता गंगा के किनारे ही विकसित हुआ। राजा राममोहनराय से लेकर दयानंद सरस्वती तक के नए सुधार आंदोलन यहीं पर शुरू हुए।

उत्तर भारत के बड़े भाग को सिंचित करने वाली गंगा यदि न होती तो प्राकृतिक दृष्टि से यह प्रदेश एक विशाल मरूस्थल हुआ होता। राम की सरयू, कृष्ण की यमुना, रति देव की चम्बल, गजग्राह की सोन, नेपाल की कोसी, गण्डक तथा तिब्बत से आने वाली ब्रह्मपुत्र सभी को अपने में समेटती हुई और अलकनंदा, जाहन्वी, भागीरथी, हुगली, पदमा, मेघना आदि विभिन्न नामों से जानी जाने वाली गंगा अंत में सुंदरवन के पास बंगाल की खाड़ी में समा जाती हैं।
भारत की सर्वाधिक महिमामयी नदी ‘गंगा’ आकाश, धरती, पाताल तीनों लोकों में प्रवाहित होती है। आकाश गंगा या स्वर्ग गंगा, त्रिपथगा, पाताल गंगा, हेमवती, भागीरथी, जाहन्वी, मंदाकिनी, अलकनंदा आदि अनेकानेक नामों से पुकारी जाने वाली गंगा हिमालय के उत्तरी भाग गंगोत्री से निकलकर नारायण पर्वत के, Ganga river origin, Shiva, Himalaya, Ganges origin, Praktya, Bhagirathi, गंगा नदी उत्पत्ति, शिव, हिमालय, गंगा उद्गम, प्राकट्य, भागीरथी, ganga river history, ganges river facts,ganga river origin, ganges river pollut, ganges river map, ganga river history hindi
ganga river route, ganges delta, yamuna river, ganga river history in hindi, भारत के बारे में जानो, माँ गंगा का प्राकट्य, माँ गंगा नदी की कहानी, The mysterious story of Mother Ganga of India, 10 points about ganga river in hindi, गंगा नदी का जन्म कैसे हुआ था?, Ganga river system in hindi , कदुनिया की सभी सभ्यताओं में नदियों से भगवान का रिश्ता रहा है।

ताप्ती नदी जो मध्य प्रदेश‎, महारष्ट्र, ‎गुजरात में बहती हैं, देखते हैं आस पास के लोगो का जीवन ।

ताप्ती नदी जो मध्य प्रदेश‎, महारष्ट्र, ‎गुजरात में बहती हैं, देखते हैं आस पास के लोगो का जीवन ।

ताप्ती (संस्कृत : तापी, मराठी : तापी ; गुजराती : તાપ્તી) पश्चिमी भारत की प्रसिद्ध नदी है। यह मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले के मुलताई से निकलकर सतपुड़ा पर्वतप्रक्षेपों के मध्य से पश्चिम की ओर बहती हुई महाराष्ट्र के खानदेश के पठार एवं सूरत के मैदान को पार करती और अरब सागर में गिरती है। नदी का उद्गगम् स्थल मुल्ताई है।

स्रोत: मुलताई (मूलतापी भी कहते हैं) निकट बैतूल
- स्थान सतपुड़ा पर्वत

इस नदी का उद्गम सतपुड़ा पर्वत के महादेव पठार से है। ताप्ती सतपुड़ा पर्वत के दक्षिण में नर्मदा के सामानान्तर-सी बहती हुई खम्भात की खाड़ी में जा गिरती है। इस नदी की कुल लम्बाई 700 किलोमीटर है।

कोरकू जनजाति के लोग मध्यप्रदेश में सतपुड़ा पर्वतमाला के जंगलों से लगे [[छिन्दवाड़ा मवासी ,बैतूल जिले की भैंसदेही और चिचोली तहसील में, होशंगाबाद जिले में, भिण्ड जिले में, हरदा जिले की टिमरनी और खिड़किया तहसील के गाँवों में निवास करती है। इसके अतिरिक्त कोरकू महाराष्ट्र में अकोला, मेलघाट(धारणी तथा चिखलदरा) तथा मोर्शी तालुका अमला में भी रहते हैं।

यह भारत की उन मुख्य नदियों में है जो पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं, अन्य दो हैं - नर्मदा नदी और माही नदी।

यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 740 किलोमीटर की दूरी तक बहती है और खम्बात की खाड़ी में जाकर मिलती है। सूरत बन्दरगाह इसी नदी के मुहाने पर स्थित है। इसकी प्रधान उपनदी का नाम पूर्णा है। इस नदी को सूर्यपुत्री भी कहा जाता है।
समुद्र के समीप इसकी ३२ मील की लंबाई में ज्वार आता है, किंतु छोटे जहाज इसमें चल सकते हैं। पुर्तगालियों एवं अंग्रेजों के इतिहास में इसके मुहाने पर स्थित स्वाली बंदरगाह का बड़ा महत्व है। गाद जमने के कारण अब यह बंदरगाह उजाड़ हो गया है।
ताप्ती नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुल्ताई नामक स्थान है। इस स्थान का मूल नाम मूलतापी है जिसका अर्थ है तापी का मूल या तापी माता। हिन्दू मान्यता अनुसार ताप्ती को सूर्य एवं उनकी एक पत्नी छाया की पुत्री माना जाता है और ये शनि की बहन है। थाईलैंड की तापी नदी का नाम भी अगस्त १९१५ में भारत की इसी ताप्ती नदी के नाम पर ही रखा गया है। महाभारत, स्कंद पुराण एवं भविष्य पुराण में ताप्ती नदी की महिमा कई स्थानों पर बतायी गई है। ताप्ती नदी का विवाह संवरण नामक राजा के साथ हुुुआ था जो कि वरुण देवता के अवतार थे।

ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 कि.मी² में है, जो भारत के कुल क्षेत्रफ़ल का २ प्रतिशत है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51,504 कि.मी², मध्य प्रदेश में 9,804 कि.मी² एवं गुजरात में 3,837 कि.मीm² है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुल्ढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवम नासिक में फ़ैली है, साथ ही मध्य प्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है।इसके जलग्रहण क्षेत्र का79%गुजरात शेष मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है

The Tapi River originates in the Betul district from a place called Multai, in Madhya Pradesh state. The Sanskrit name of Multai is Mulatapi, meaning origin of Tāpī Mātā or the Tapti River. Tāptī is the daughter of Surya, the Sun God and his wife, Chhaya. Tapti is also known as sister of Lord Shani.

Payoshni (पयोष्णी) (Mahabharata) (III.83.37), (III.86.4), (VI.10.15), (VI.10.19),
Tapati River (तपती नदी) (ancient original name)
Tapti River (ताप्ती नदी)
Tapi River (तापी नदी)
Tapati (तपती)
Tapti (ताप्ती)
Tapi (तापी) = = Tapti River ताप्ती नदी (AS, p.393)
Tapti (ताप्ती) = Tapi (तापी) (AS, p.393)
Nanagouna = Tapti (by Ptolemy)

Adi Parva, Mahabharata/Mahabharata Book I Chapter 89 tells us History of Puru and Pandavas (Aila dynasty).

Genealogy of Puru : Puru (wife: Paushti) → 1.Pravira, 2.Iswara, and 3. Raudraswa

1. Pravira (w:Suraseni) → Manasyu (w:Sauviri) → Subhru, Sahana, and Vagmi.

3. Raudraswa (w:Misrakesi) → Richeyu (=Anadhrishti) (+9 more) → Matinara → Tansu (+3 more) → Ilina (w:Rathantara → Dushmanta (w:Sakuntala) (+4 more) → Bharata → Bhumanyu (Pushkarini) → Suhotra (w:Aikshaki) (+5 more) → Ajamidha (w: Dhumini) → Riksha → Samvarana (w:Tapati) (migrated to Sindhu River) → Kuru (w:Vahini) → Abhishyavanta → Parikshit → Janamejaya → Dhritarashtra (+Pandu & 6 more) → Pratipa (+2 more) → Santanu



ताप्ती, तापी, सूर्य पुत्री, नदी, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, सूरत, बुरहानपुर, भुसावल, बैतूल, नन्दुरबार, खम्भात की खाड़ी (अरब सागर), दुमास, सूरत, गुजरात, भारत, मुल्ताई, नेपानगर, बैतूल और बुरहानपुर मध्य प्रदेश में, तथा भुसावल महाराष्ट्र्र में एवं सूरत और सोनगढ़ गुजरात में, History Of Tapti River, tapi river in hindi, tapti, tapti river, tapti, river hindi, tapti nadi kis chetra se nikalti hai, narmada river details in hindi, sabarmati river in hindi, godavari river in hindi, krishna river in hindi, kaveri river in hindi, tapti nadi ki sahayak nadiyan, tapi nadi kahan girti hai, ताप्ती जयंती, पुराणों में ताप्तीजी की जन्म कथा, बैतूल, पुराणों में ताप्ती, मुलताई, सूर्यपुत्री ताप्ती, Madhya Pradesh Weather Update, heavy rain alert in madhya pradesh, Tapti River above danger mark, burhanpur rain, burhanpur news, madhya pradesh news,burhanpur, madhya-pradesh, hindi, Explore Tapti River with News, Videos, Tapti River, भारत (दक्षिणमध्य मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तरी महाराष्ट्र), tapti river history hindi, tapti river history hindi, नदी का उद्गम,

उत्तराखंड के कॉर्बेट नेशनल पार्क के आस पास के गाँव कितना कठिन, संघर्षपूर्ण और खतरनाक हैं जीना यहां।

उत्तराखण्ड के जंगलों में इंसान का बढ़ता दखल खतरनाक है कोई जानवर किसी इंसान की जान का दुश्मन कब बनता है?
कॉर्बेट नेशनल पार्क हिमालय की शिवालिक पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित है,

मनुष्य और वन्यजीव के बीच सदियों से संघर्ष रहा है. इस संघर्ष को वर्तमान परिपेक्ष्य में कैसे देखें? कोई जानवर किसी इंसान की जान का दुश्मन कब बनता है? या यूं कहें कि परस्परतापूर्ण संचालित जीवन कैसे एक-दूसरे की बलि लेने पर आमादा हो जाता है? इस महत्वपूर्ण सवाल को समझने की आवश्यकता है. यदि आधुनिक विकास को कुछ हद तक जिम्मेदार मान भी लें तो यह गुत्थी सुलझने वाली नहीं है. बदलते मौसम पर भी ठीकरा फोड़ दें, तब भी मानव और वन्य जीवों के संघर्ष की गाथा को समझना आसान नहीं होगा. किसी के जीवन, परिवार और आश्रय में बाहरी दखल ही अन्ततः संघर्ष का पर्याय बनता है. हालांकि सदियों से मानव और वन्यजीवों का आपस में घनिष्ठ संबंध भी रहा है. दोनों एक दूसरे के परस्पर सहयोगी रहे हैं. इसके बावजूद वनप्राणी अपने घरोंदों को छोड़ने के लिए विवश क्यों हुए? कभी तो वनों में प्रचुर प्राकृतिक संसाधन रहे होंगे कमोवेश आज भी हैं.

दरअसल वनों पर अत्यधिक मानवीय हस्तक्षेप ही वन्य जीवों के साथ मानव के संघर्ष का प्रथम कारण बना. वनों का व्यावसायिक उपयोग, उद्योग जगत का विस्तार और आधुनिक जीवनशैली तथा बाजारीकरण और नगरीय सभ्यता के विकास ने दुनिया के कोने-कोने में कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए. सड़कों का जाल ऐसे बिछा कि जंगल के बाशिंदे भोजन और आवास के लिए तरसने लगे. परिणामस्वरूप उनका पदार्पण मानव बस्तियों की ओर होने लगा. तो क्या विकासपरक नीतियां ही मानव और वन्य जीवों के संघर्ष के पीछे महत्वपूर्ण कारक है? जंगलों के दोहन के साथ सेंचुरी और नेशनल पार्क के निर्माण ने वनों के आस-पास निवास करने वाले स्थानीय निवासियों को उनके हक से वंचित किया है. जबकि यह वही स्थानीय निवासी थे, जिन्होंने सदियों से बिना व्यावसायिक दोहन के हमेशा वनों का उचित उपयोग करते हुए उसके संरक्षण का भी काम किया था. विडंबना ही कहेंगे कि इस मुद्दे को सिरे से नकार दिया जाता है. राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विमर्श हाशिये के समाजों की जीवन शैली को समझने में असमर्थ ही रहे हैं.

पर्यटन के नाम पर जंगलों को कमाई का केन्द्र बना देना भी मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष का कारण बन गया है. जितना बड़ा वन क्षेत्र उतनी ही संख्या में सफारी और जंगल रिज़ॉर्ट में रहने का रोमांच पर्यटन को बढ़ावा तो दे रहा है और कमाई का माध्यम भी बन रहा है. लेकिन इस नीति ने वन्यजीवों की निजता का हनन किया है. लगातार बढ़ता इंसानी दखल उनको पलायन करने पर मजबूर कर रहा है और शिकार की तलाश में वह इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में सबसे अधिक स्थानीय समाज भुग्तभोगी बनता है, नुकसान भी झेलता है और सरकारी मुआवजे की राह तकते रहता है. उत्तराखण्ड के सन्दर्भ में देखें तो 1936 में राम गंगा अभ्यारण का निर्माण हुआ, यह पहला संरक्षित क्षेत्र रहा. कालान्तर में जिम कॉर्बेट पार्क के नाम से मशहूर हुआ. इसके बाद श्रृंखलाबद्ध संरक्षित क्षेत्रों का दायरा बढ़ता गया.

महान शिकारी, पर्यावरणविद, फोटोग्राफर और लेखक जिम कार्बेट की जिंदगी जंगल के रहस्य और एक खूबसूरत इंसान का दस्तावेज है। आप उनके बारे में जितना जानेंगे जिज्ञासा उतनी ही बढ़ती जाएगी। दर्जनों खतरनाक बाघ और तेंदुओं से लोगों की जिंदगी बचाने वाले जिम ने कुछ वक्त के बाद शिकार करना छोड़ दिया और उनके संरक्षण.

आंकड़े बताते हैं कि रामनगर वन क्षेत्र में 2010-2011 में 7 लोगों को बाघ ने निवाला बनाया जिसमें 6 महिलाएं और 1 पुरूष शामिल थे. बागेश्वर गरूड़ में 2017-18 में 5 मासूम बच्चों को गुलदार ने मार डाला. सभी बच्चे 7 से 12 साल की उम्र के थे. नेशनल पार्क के आस-पास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगो के लिए वन्यजीव खासा मुसीबत के सबब बन रहे हैं, जिम कार्बेट पार्क के आसपास के क्षेत्र जैसे पम्पापुरी में हिरनों के झुण्ड आसानी से बस्ती में घुस आते हैं, हालाकि हिरनों से लोगों को जान माल का नुकसान नहीं होता लेकिन हिरन तेंदुए के लिए आसान शिकार होता है और आसान शिकार की तलाश में तेंदुआ मानव पर भी हमला करता है. बहरहाल जब तक वन संरक्षित क्षेत्र में इंसानी दखलंदाजी को रोका नहीं जायेगा, जंगल सफारी के नाम पर वन्यजीवों की जिंदगी में विघ्न डालना बंद नहीं किया जायेगा, आवश्यकता से अधिक पूर्ति के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई रोकी नहीं जाएगी और विकास के नाम पर विनाश की प्रक्रिया बंद नहीं की जाएगी वन्य जीव बनाम इंसान का संघर्ष जारी रहेगा.

Elephants, tourists, Corbett National Park, Uttarakhand, Ramnagar, wild elephant, elephant attack, elephant attack on the car,हाथी, पर्यटक, कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड, रामनगर, जंगली हाथी, हाथी का आतंक, कार पर हाथी का हमला,Hindi News, News in Hindi, Hindustan, हिन्दुस्तान, Helpline issued for corbett national park tourist, helpline for corbett national park, helpline for corbett national park tourist, corbett national park news, Dehradun News in Hindi, Latest Dehradun News in Hindi, Dehradun Hindi Samachar, nainital-jagran-special,news,state,jim corbatt death anniversary, 19 April death anniversary of jim corbatt, jim corbatt, jim corbatt national park, biography of jim corbett the man who is know as hunter of man eater tigers, Jim Corbett Biography, HP jagaran special , जिम कॉर्बेट ,News,National News,uttarakhand news Nainital Uttarakhand hindi, मनुष्य और वन्यजीव के बीच सदियों से संघर्ष रहा है., संघर्ष को वर्तमान परिपेक्ष्य में कैसे देखें, हाथी, बाघ, चीतल, सांभर हिरण, नीलगाय, घड़ियाल, किंग कोबरा, मुंतजिक, जंगली सूअर, हेजहोग, आम मस्क श्रू, फ्लाइंग फॉक्स, इंडियन पैंगोलिन , उत्तराखंड के रामनगर, उत्तराखंड

भारत के ग्लेशियर (Glaciers of India) का लुप्त होने का ख़तरा। जो कि काफी चिंताजनक है। कारण और उपाय ?।

भारत के ग्लेशियर (Glaciers of India) का लुप्त होने का ख़तरा। जो कि काफी चिंताजनक है। कारण और उपाय ?।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ते तापमान की वजह से हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की यही रफ़्तार रही तो 2035 तक वे विलुप्त हो जाएँगे. अध्ययन में पाया गया है कि हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ़्तार बहुत तेज़ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि कश्मीर में कोल्हाई ग्लेशियर पिछले साल 20 मीटर से अधिक पिघल गया है जबकि दूसरा छोटा ग्लेशियर पूरी तरह से लुप्त हो गया है. ब्राउन क्लाउड हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकी अनुसंधान संस्थान के मुनीर अहमद का कहना है कि ग्लेशियरों के इस कदर तेज़ी से पिघलने की वजह ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ 'ब्राउन क्लाउड' है. दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट की तलहटी में भी काले धूल के कण हैं और इनका घनत्व प्रदूषण वाले शहरों की तरह है

दरअसल, ब्राउन क्लाउड प्रदूषण युक्त वाष्प की मोटी परत होती है और ये परत तीन किलोमीटर तक मोटी हो सकती है. इस परत का वातावरण पर विपरीत असर होता है और ये जलवायु परिवर्तन में अहम भूमिका निभाती है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी यूएनईपी की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट की तलहटी में भी काले धूल के कण हैं और इनका घनत्व प्रदूषण वाले शहरों की तरह है. शोधकर्ताओं का कहना है कि क्योंकि काली-घनी सतह ज़्यादा प्रकाश और ऊष्मा सोखती है, लिहाजा ग्लेशियरों के पिघलने की ये भी एक वजह हो सकती है. अगर ग्लेशियरों के पिघलने की रफ़्तार अंदाज़े के मुताबिक ही रही तो इसके गंभीर नतीजे होंगे. दक्षिण एशिया में ग्लेशियर गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी अधिकाँश नदियों का मुख्य स्रोत हैं. ग्लेशियर के अभाव में ये नदियां बारामासी न रहकर बरसाती रह जाएँगी और कहने की ज़रूरत नहीं कि इससे लाखों, करोड़ों लोगों का जीवन सूखे और बाढ़ के बीच झूलता रहेगा.

Himalayan Glaciers Are Melting Twice As Fast Since 2000 - 15 साल में दोगुनी गति से पिघले हैं हिमालय के ग्लेशियर्स

The Himalayan Mountains are home to the highest peak in Mount Everest at 29,029 feet, but also to the third largest deposit of ice and snow in the world, after Antarctica and the Arctic. Now the first complete study of this remote region reveals that its glaciers lost billions of tons of ice—equivalent to more than a vertical foot and half of ice each year—from 2000 to 2016.

The Indo-Gangetic Plain, an extremely polluted region, has amplified the effects of greenhouse gases. Deposits of black carbon and dust have sped up the melting of Hindu Kush glaciers.

In the central Gangetic plains, compared to pollutants discharged from lower parts of the river basin, the pollutant load from glacial meltwater can be as low as 2% but also as high as 200%, the scientists found. “By remobilising legacy pollutants from melting glaciers, climate change can enhance exposure levels over large and already heavily impacted regions of northern India,” the report says.

Although the levels measured in water “are relatively low, especially for PCBs”, nevertheless, higher levels in algae and fish, lead author Luca Nizzetto from NIVA said. Levels of PCBs especially tend to magnify throughout the food chain and “will reach top levels in predators and final consumers such as humans.”

Before we get to the effect of melting glaciers on Himalayan rivers, we need to understand where they get their water.

For much of Himalayas, rain falls mostly during the monsoon active between June and September. The monsoon brings heavy rain and often causes devastating floods, such as in northern India in 2013, which forced the evacuation of more than 110,000 people.

himalaya, glaciers, melting, ice, global, warming, pollution, हिमालय, ग्लेशियर, पिघलना, बर्फ, ग्लोबल, वार्मिंग, प्रदूषण, ग्लेशियर के लुप्त होने का ख़तरा, Environment, glacier, himalaya, Jaipur, north India, Rajasthan, Jaipur News, Jaipur News in Hindi, जयपुर न्यूज़, Jaipur Samachar, Himalayan glacier, himalayan glacier melting, melting ice, global warming, rising temperature, river levels, nasa, isro, kedarnath, himalayan tsunami, India News in Hindi, Latest India News Updates, india ke glacier pollution hindi, causes of melting of himalayan glaciers,himalayan glacier melting,reasons for melting of glaciers in india,melting glaciers in india,effects of melting himalayan glaciers,impact of climate change on himalayan glaciers,himalayan glaciers growing,what will happen if the himalayan glacier melts, Glaciers in Himalayas, हिंदू कुश हिमालय, ग्लेशियर पिघलने से मानसून पर प्रभाव, Glaciers,Climate change,Environment,China,Nepal,South and Central Asia,World news,India,Pakistan, Glaciers,melting glaciers,Hindu Kush,glabal warming,Hindu Kush glaciers, himalayan mountains, melting glaciers, global warming, climate change, what will happen if the himalayan glacier melts, why is glacier melt a problem, glaciers, glaciology, ice, himalayas, environment, geography, science, pollutants buried under glaciers surface to haunt India, landslides,glacier,Intergovernmental Panel on Climate Change,glaciers,kerala floods,Yamuna,Bay of Bengal,ganga,IMD,Uttarakhand,Rains,Himalayas,paris agreement,floods,monsoon,nepal,south asia,weather,Global warming,Climate change.

#indan fisherman #Indian fish market

कृपया हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें हम गांव की पौराणिक सभ्यता संस्कृति लोगों का रहन सहन रोजगार मुगलकालीन इमारतें लोगों का रोजमर्रा की दैनिक दिनचर्या खेत खलिहान इन सारे वीडियोस बताते दिखाते हैं
x

#20 #DECEMBER की ऐतिहासिक कहानियां: #AJAYA #BHARAT #EXCLUSIVE

क्या आप जानते हैं आज के दिन इतिहास में क्या कुछ खा हुआ था...आज के दिन कौन सा शासक जेल से हुआ था रिहा...कौन सी नई संघ का हुआ था गठन...भगवान वेंकटेश्वर को क्या चढ़ाया गया था आज...इतिहास में आज की घटनाओं को जानिए #AJAYA #BHARAT पर #EXCLUSIVELY शिप्रा झा के साथ..

Indian historical place#भारत के ऐतिहासिक स्थल

Is video me humne bharat ke kuch historical place ke baare me bataya h....
maine India ke rahasyammyi jaghon ke baare me bataya h......
agar aap aur v aisi hi romanchak aur Khoobsurat place ke baare me jankari pana chahte h to pls comment kre..........

भारत का इतिहास INDIAN HISTORY

भारत का इतिहास भारत का इतिहास कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। 65,000 साल पहले, पहले आधुनिक मनुष्य, या होमो सेपियन्स, अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचे थे, जहां वे पहले विकसित हुए थे। सबसे पुराना ज्ञात आधुनिक मानव आज से लगभग 30,000 साल पहले दक्षिण एशिया में रहता है।

प्राचीन भारत का इतिहास अध्याय-8-बौद्ध धर्म,भाग 2????

बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण तथ्य➖➖➖

500 saal purana vimaan.

its intrasting
x

World Heritage Day : Ahmedabad Swaminarayan Temple is the sample of historical monument

TAJ AGRO TV EGG POWDER AD1

TAJ AGRO TV EGG POWDER AD1

जानिए कैसे होंगा मानव सभ्यता का विनाश

वृक्षारोपण कार्य सर्वोपरि आज नहीं जगे तो कल विनाश पक्का है

Shares

x

Check Also

x

Menu